Diwa777 की सीमा संबंधी भाषा: प्रतिदिन, प्रति व्यक्ति या प्रति गतिविधि?

किसी संख्या को पूरी सुविधा का विवरण मानने से पहले उसके साथ दी गई गिनती की इकाई समझें।

संख्या के बाद लिखे कुछ शब्द किसी मात्रा को ज्यादा या कम दिखा सकते हैं। “प्रतिदिन”, “प्रति व्यक्ति” और “प्रति गतिविधि” अलग चीजें गिनते हैं। ये शब्द छूटने से कथन बदल जाता है।

Diwa777 के सार्वजनिक पेज में पैसे से जुड़ी प्रचार भाषा है, लेकिन यहां पढ़ा स्रोत किसी खास मुफ्त मात्रा की पुष्टि नहीं करता। नीचे उदाहरण सामान्य मुफ्त संसाधनों की इकाई समझाते हैं। वे Diwa777 की शर्तें या इनाम पाने के निर्देश नहीं हैं।

प्रति व्यक्ति बताता है कि किसे गिना गया

काल्पनिक पढ़ने की परियोजना में प्रति व्यक्ति एक मुद्रित गाइड बताई जा सकती है। यह इकाई प्राप्तकर्ता की है। इससे रोज नई मात्रा, हर बार आने पर अलग कॉपी या हर गतिविधि के लिए अलग हिस्सा तय नहीं होता।

सार में प्राप्तकर्ता की इकाई रखें; उसकी जगह आने की संख्या न लिखें। दूसरी शर्तें हों तो परियोजना को उनका अलग विवरण देना होगा।

इकाई स्पष्ट होने से छोटा वाक्य बनाते समय मिलने वाली चीज अपने आप बढ़ नहीं जाती।

प्रतिदिन एक अवधि बताता है

अब दूसरी सूचना मानें जिसमें प्रतिदिन तीन नई कार्यपत्रक प्रकाशित होने की बात है। यह संख्या पूरे संग्रह की प्रकाशन समय-सारणी हो सकती है। इससे हर पाठक के लिए तीन अतिरिक्त चीजों का वादा अपने आप नहीं बनता।

अवधि जितना ही उसका विषय जरूरी है। पूछें कि वाक्य प्रकाशित संसाधन, व्यक्तिगत इस्तेमाल या कोई और चीज गिनता है।

समय महत्वपूर्ण हो, तो दिन की सीमा भी स्पष्ट चाहिए। रीसेट का समय खुद न बनाएं और अज्ञात सेवा में पाठक की आधी रात लागू न मानें।

प्रति गतिविधि अलग विषय पहचानता है

तीसरी काल्पनिक सूचना प्रति गतिविधि एक स्पष्टीकरण नोट दे सकती है। इससे नोट और गतिविधि का संबंध पता चलता है। कितनी गतिविधियां हैं या सब उपलब्ध हैं, यह नहीं बताया जाता।

यह भी नहीं कहा गया कि कोई दोबारा पढ़े तो नोट नया हो जाता है। दोहराव और नया पात्र विषय अलग विचार हैं।

ये उदाहरण अलग इकाइयां समझाते हैं। इन्हें जोड़कर बड़ी मात्रा बनाने वाली शर्तें न मानें।

साथ दी सीमाओं को अलग कथन रखें

वास्तविक शर्तों में कई सीमाएं हों, तो हर सीमा अपने विषय के साथ रखें। संख्याएं न जोड़ें और केवल अपने लिए ज्यादा अनुकूल शर्त न चुनें।

संबंध अस्पष्ट हो, तो प्रकाशक से सवाल है: प्रत्येक सीमा किस संसाधन पर है और दोनों को साथ कैसे समझना है?

उपयोगी नोट में मात्रा, प्राप्तकर्ता या वस्तु, अवधि और बताई निर्भरता रहती है। जानकारी न हो, तो उसे अनिर्दिष्ट रखें। लाभ पूरे वाक्य का सही अर्थ समझना है, अधूरी सीमा को निश्चित मुफ्त आवंटन बनाना नहीं।